इन्टरनेट की दुनिया में उपलब्ध हिंदी पत्रिकाओ का एक छोटा सा संग्रह
इनके लिंक इनके नाम पर ही दिए गए हैं उन पर क्लिक कर आप उनके मूल websites पर जा सकते है ।

ये लेख मूल रूप से विकिपीडिया पर उपलब्ध है
यहाँ क्लिक कर मूल लेख पढ़ सकते है
  • संस्कृति - सांस्कृतिक विचारों की प्रतिनिधि अर्द्धवार्षिक पत्रिका, संस्कृति मंत्रालय (भारत सरकार) द्वारा प्रकाशित

34 comments:

  1. महोदय हमारी पत्रीका ''वन्‍दे ईश्‍वरम'' का नाम का भी उल्‍लेख किया जाय
    http://vandeishwaram.blogspot.com/

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  2. अतुल्यकीर्ति व्यास15 January 2010 at 4:24 pm

    भागीरथी प्रयास किया है आपने, हिन्दी टाइपिंग का अभ्यास कर रहा हूँ.
    आपका
    अतुल्य
    atulyakirti@gmail.com

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  3. अत्यन्त महत्वपूर्ण, उपयोगी और सराहनीय कार्य किया है आपने !
    आभार ।

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  4. महत्वपूर्ण, उपयोगी जानकारी खासकर हिन्दी भाशा वालो के लिये-बहुत-बहुत धन्यवाद नवीन जी

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  5. loksangharsh patrikahindi
    quaterly magzine hai jiska poora ank loksangharsha.blogspot.com par uplabdh rehta hai kripya link jodne ka kast karein.


    http://loksangharsha.blogspot.com/

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  6. भाई कितना बड़ा कार्य किया आपने..!

    मन से बेहद आभारी हूँ...!

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  7. धन्यवाद नवीन भाई.

    वागार्थ का सही लिंक है http://www.bharatiyabhashaparishad.com

    हंस अभी आनलाईन नही है.

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  8. "अनुरोध -
    इन्टरनेट की वर्तनी सही कर दीजिए -
    इंटरनेट या इण्टरनेट!"

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    Replies
    1. इन्टरनेट की दुनिया में

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  9. कम से कम यह तो लिखें कि मूल सूची हिन्दी विकीपीडिया से ली गई है। वरना यह चोरी कहलायेगी।

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  10. Stolen from http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B2_%E0%A4%AA%E0%A4%B0_%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%A4_%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80_%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%81

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  11. मैंने देख लिया है -
    यह तो सचमुच की चोरी है -
    अब तो इस कार्य की
    जितनी निंदा की जाए - कम है!

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  12. यह भी कोई बात हुई -
    "ज्यों का त्यों चुराकर छाप दिया!"

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  13. रावेन्द्र कुमार रवि जी की बात 'ज्यो का त्यो चुराकर'कहना बिलकुल गलत है बात जानकरी उपलब्ध कराने की है न की चुराने की है..मुफ्त मे कोइ जानकारी भी दे और आप उसे चोर बना दे वाह भाई वाह..

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  14. इसे चोरी कहना बिल्कुल गलत है
    अगर आपको लगता है कि ये चोरी है तो आप जहां से चोरी की गई है वहां का लिंक तो दें महाशय

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  15. kuchh logon ko ninda me hi sukh milata ai. lekin aap apana kaam karate rahe. ek janaaree dee hai, mehanat i hai. inhe protsahit kiya jana chahiye.navin ka navin aam sarhneey hai.

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  16. नवीन जी, आपने बहुत ही अच्छा काम किया है. बहुत ही लाभप्रद है.
    धन्यवाद.
    हिन्दीकुंज

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  17. रावेंद्रकुमार रवि जी और अन्य पाठक
    मैंने ब्लॉग वाणी पर अस्मिता जी का लेख देखा
    http://smitamishr.blogspot.com/2010/01/blog-post_1367.html
    यहाँ पर उसमे लिंक नहीं थी मैंने काफी पहले ये लेख पढ़ा था तो मैंने सोचा की क्यूँ न इसमें लिंक भी लगा दी जाए
    आप मुझे चोर कह सकते है पर मैं इसे चोर पे मोर कहूँगा ।

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  18. मोर साहब!
    जब एक जानकारी अंतरजाल पर एक उचित स्थान पर लगी हुई है,
    तो उसे यहाँ-वहाँ लगाने से क्या लाभ!
    जानकारी तो इतना-सा काम करके भी दी जा सकती थी -

    विकिपीडिया पर उपलब्ध है यह सूची -
    अन्तरजाल पर स्थित हिन्दी पत्रिकाएँ

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  19. और इसे आप अपने ब्लॉग के
    साइडबार में कहीं भी लगा सकते थे!
    मेरी मानिए, तो इस पोस्ट को हमेशा के लिए मिटा दीजिए!

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  20. नवीन जी कार्य तो आपने सराहनीय किया है।
    किन्तु जहाँ इस पोस्ट की प्रशंसा होनी चाहिए,
    वहाँ निन्दा हो रही है।
    जानते हो क्यों?
    क्योंकि आपने यह पोस्ट http://smitamishr.blogspot.com/2010/01/blog-post_1367.html से उड़ाई है।
    आपने कथितरूप से इस अपनी पोस्ट में smita mishra के नाम का कहीं भी न तो उल्लेख किया है तथा न ही आभार प्रकट किया है।
    हम तो कहीं से एक चित्र भी लगाते हैं तो साभार जरूर लिखते हैं।
    अब आपको लिंक के साथ smita mishra का आभार प्रकट करके इसको लगाना ही चाहिए। तभी आप चोरी के कलंक से दोषमुक्त हो सकते हैं। ब्लॉगर बहत उदारमना होते हैं। यदि आप smita mishra से इजाजत ले लें तो ज्यादा अच्छा होगा।
    अन्यथा यह पोस्ट हटा दें!

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    Replies

    1. मैं ये कभी नहीं कहता की इस ब्लॉग पर दी गयी चीजे मैंने बनाई है मेरा काम है जानकारिया ढूंढना और उन्हें अपने ब्लॉग के पाठको को उपलब्ध करना ।
      अपने एक पोस्ट
      http://computerlife2.blogspot.com/2009/10/blog-post.html
      पर मैंने ये बात पहले ही कह दी है
      अंतरजाल पर जानकारियां तो सभी है जिन्हें मेरा ब्लॉग पसंद नहीं वो खुद ही ढूंढ सकते है परन्तु जो बातें मुझे लगता है की मेरे लिए उपयोगी रही है और अन्य किसी के काम आ सकती है उन्हें इस ब्लॉग पर देने की कोशिश रहती है । ना मैं बहुत ज्ञानी हूँ और ना ऐसा साबित करने की कोशिश है ।

      मेरा प्रयास बस इतना है की जो इतने सालो में ढूंढ कर जानकारिया इकट्ठी की है उसे आपके साथ बांटू शायद आपके काम आ सके ।

      और इतना गुस्सा होने की जरुरत किसी को नहीं है मेरा प्रयास आपका काम आसान करना है ताकि आपके काम की ज्यादा से ज्यादा चीजे एक स्थान पर मिल सके ,

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  21. नवीन प्रकाश said...
    16 January 2010 15:01
    रावेंद्रकुमार रवि जी और अन्य पाठक
    मैंने ब्लॉग वाणी पर अस्मिता जी का लेख देखा
    http://smitamishr.blogspot.com/2010/01/blog-post_1367.html
    यहाँ पर उसमे लिंक नहीं थी मैंने काफी पहले ये लेख पढ़ा था तो मैंने सोचा की क्यूँ न इसमें लिंक भी लगा दी जाए
    आप मुझे चोर कह सकते है पर मैं इसे चोर पे मोर कहूँगा ।

    नवीन प्रकाश जी!
    इस प्रकार की सफाई देने से आप दोषमुक्त नही हो सकते!

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  22. इस महत्वपूर्ण जानकारी के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद।

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  23. मेरी दृश्टि में तो दोनों ही दोषी हैं।
    जानकारी विकी पीडिया पर है लेकिन
    विकीपीडिया का उल्लेख तो किसी ने नहीं किया।
    न ही स्मिता जी ने और न ही नवीन जी ने।
    विकीपीडिया का आभार तो करना ही चाहिए था!
    http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B2_%E0%A4%AA%E0%A4%B0_%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%A4_%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80_%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%81

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  24. सबसे पहले तो डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी के आदेशानुसार विकिपीडिया की मूल लिंक लगा दी गई है ।

    अब बात
    "मोर साहब!
    जब एक जानकारी अंतरजाल पर एक उचित स्थान पर लगी हुई है,
    तो उसे यहाँ-वहाँ लगाने से क्या लाभ!"

    और

    "आपने यह पोस्ट http://smitamishr.blogspot.com/2010/01/blog-post_1367.html से उड़ाई है।"

    मैं ये कभी नहीं कहता की इस ब्लॉग पर दी गयी चीजे मैंने बनाई है मेरा काम है जानकारिया ढूंढना और उन्हें अपने ब्लॉग के पाठको को उपलब्ध करना ।
    अपने एक पोस्ट
    http://computerlife2.blogspot.com/2009/10/blog-post.html
    पर मैंने ये बात पहले ही कह दी है
    अंतरजाल पर जानकारियां तो सभी है जिन्हें मेरा ब्लॉग पसंद नहीं वो खुद ही ढूंढ सकते है परन्तु जो बातें मुझे लगता है की मेरे लिए उपयोगी रही है और अन्य किसी के काम आ सकती है उन्हें इस ब्लॉग पर देने की कोशिश रहती है । ना मैं बहुत ज्ञानी हूँ और ना ऐसा साबित करने की कोशिश है ।

    मेरा प्रयास बस इतना है की जो इतने सालो में ढूंढ कर जानकारिया इकट्ठी की है उसे आपके साथ बांटू शायद आपके काम आ सके ।

    और इतना गुस्सा होने की जरुरत किसी को नहीं है मेरा प्रयास आपका काम आसान करना है ताकि आपके काम की ज्यादा से ज्यादा चीजे एक स्थान पर मिल सके ,

    ReplyDelete
  25. नवीन, उपयोगी जानकारी दी है। ऐसी प्रकाशित जानकारियों को फिर से ताजा करना भी जरूरी काम है।

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  26. मेरा प्रयास बस इतना है की जो इतने सालो में ढूंढ कर जानकारिया इकट्ठी की है उसे आपके साथ बांटू शायद आपके काम आ सके ।
    बिलकुल आपने सही लिखा है इसी तरह ज्ञान बाट्ते रहे-हम आपके ज्ञान के प्रकाश से लाभान्वित होते रहे नवीन जी..
    एक कहावत है'चोरो को सारे नजर आते है चोर'

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  27. मेरी बात पर ध्यान देने के लिए,
    नवीन प्रकाश जी आपका शुक्रिया।

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  28. इस महत्वपूर्ण जानकारी के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद।...

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  29. नवीन जी ! श्री रजनीश परिहार से आपके ब्लॉग के बारे में जाना. निस्संदेह आपके ब्लॉग पर बहुत उपयोगी जानकारियाँ एक साथ उपलब्ध हैं जिन्हें ढूँढने में किसी को भी घंटों मेहनत करनी पड़ सकती है. धन्यवाद! आलोचकों के पास शायद और कोई काम नहीं है जो आपका ब्लॉग खोले माथापच्ची करते रहते हैं ?

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  30. photo tech ke bare me hindi me likhi jankari kaha per milegi

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  31. बडे शब्‍दों का बोझा नहीं डालते हुए सीधे से कह रहा हूं...बेहतरीन प्रयास.

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