ऋषिकेश के बाद हम चले दिल्ली की ओर पर यहाँ एक सफाई दे दूँ की चंडी माता मंदिर और मनसा देवी मंदिर हरिद्वार, नीलकंठ मंदिर ऋषिकेश भी गया था पर चूँकि कुछ निजी स्वार्थ से गया था इसलिए इसका उल्लेख न कर सका ।
वैसे दिल्ली जाने तक की यात्रा भी काफी दिलचस्प रही हुआ यूँ की हमने नियत समय से कुछ पहले ही शाम को ही ऋषिकेश से दिल्ली जाने वाली बस पकड़ ली ।

अब थोड़ी देर बाद ध्यान आया की हमारा कार्यक्रम तो सुबह दिल्ली पहुँचाने का था और इस बस से तो रात 12 के आस पास दिल्ली पहुंचेंगे अब तीनो मनाने लगे की हमारी बस खराब हो जाए या जाम में फंस जाए जिससे बस में सोते हुए ही सुबह दिल्ली पहुंचे ।

अब आ तो हम गंगा मैया के पास से रहे थे मेरठ पहुँचते ही बस ने चलने से इनकार किया और सड़क किनारे रूठकर खड़ी हो गयी ध्यान दें कि ये बस उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन की थी तो पुराने दिनों की याद हो आई जब हमें भी मध्य प्रदेश की परिवहन बसों में यात्रा करनी पड़ती थी अब छत्तीसगढ़ को ऐसे अनुभवों से थोड़ी मुक्ति मिली है ।
अब बाकी यात्री परेशान और हम खुश पर ये ख़ुशी ज्यादा देर रही नहीं कुछ यात्री परिवार और बच्चो के साथ थे फिर प्रार्थना की अब चला जाए थोड़ी ही देर में दूसरी बस आई और जाम में फंसते हुए सुबह को ३ बजे कश्मीरी गेट बस अड्डे पहुंचे ।

वह ऑटो चालक कि चतुराई में कुछ लुटते कुछ बचते पहाड़गंज पर एक होटल किया और सुबह टूरिस्ट बस का टिकट कटा कर सो गए ।

अब बात दिल्ली दर्शन कि सबसे पहले तो बस से बिडला मंदिर पहुंचे वह तस्वीरे लेना मन था इसलिए कोई तस्वीर नहीं ।


अगली बारी थी इंदिरा स्मृति संग्रहालय की काफी अनोखी चीजें आर जानकारियां है वहां ये ऊपर दिखाई दे रहे महाशय भी थे वहां ।

ये है राष्ट्रपति भवन जहाँ से भवनों के उद्घाटन के लिए तो समय मिलता है पर किसी की "जान" के लिए फैसला करने के लिए समय नहीं है ।

ये है राष्ट्रीय अखाडा मतलब संसद भवन ।

इन दोनों जगहों के बीच एक आम आदमी ।

इंडिया गेट । समझ नहीं आता ये इस गेट से गुजरकर देश में आयेंगे या विदेशी हो जायेंगे ।

एक ऐसी आग जो आपके अहम् को पिघलाकर नत मस्तक होने मजबूर कर देती है ।

क़ुतुब मीनार । ह्म्म्मम्म्म्म बात तो है ।


अन्दर की खूबसूरती की तलाश (!!) के लिए बनाई गयी बाहर से खुबसूरत इमारत ।


एक महान आत्मा को जरा दूर से ही प्रणाम किया क्यूंकि अगर उनकी नींद में खलल पड़ जाता और उठकर आज का भारत देख लेते तो ???????

आज भी गर्व से सर उठाये खडें है ।


मेट्रो पहुंचने तक थकान काफी हो गयी थी ।

पेट की आग बुझी जामा मस्जिद के सामने मशहूर करीम होटल में ।


ये था भाई अपना काम और इस चित्र पर क्लिक कर लें आपके भी काम की चीजें निकल सकती हैं ।

अक्षरधाम में तस्वीरें लेना मना है और पराठेवाली गली के जायके में तस्वीरे लेने का ध्यान नहीं रहा फिर लाजपत मार्केट के कुख्यात लूट का भी निशाना बने ।

अब क्षमा याचना समय की कमी और दोस्तों की तबियत बिगड़ने की वजह से ना आगरा जा पाए और न ही राजीव जी, फिरदौस जी से मुलाकात ही हो पायी ।

अगले महीने फिर दिल्ली और आगरा का कार्यक्रम बन सकता है इस बार दिल्ली वालों को जरुर तंग करेंगे ।

कल से वापस पुराने ढर्रे पर ...........

3 comments:

  1. बहुत सुन्दर संस्मरण...

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  2. दिल्ली दर्शन करवाने के लिये धन्यवाद

    प्रणाम

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